Hello Friends , आज आपको आंध्र प्रदेश में निषिद्ध संपत्तियों की जानकारी के बारे में बताया जायेगा जिसमे की, भूमि ख़रीदने से पहले यह जांचना जरूरी है कि वह संपत्ति निषिद्ध सूची में तो नहीं है। आंध्र प्रदेश में निषिद्ध संपत्तियों के बारे में जानकारी हासिल करना बेहद जरूरी होता है, खासकर जब आप जमीन खरीदने या बेचने का सोच रहे हों।
राज्य सरकार ने IGRS AP पोर्टल के माध्यम से लोगों को ऐसी भूमि की सूची उपलब्ध कराई है जिन्हें बिना सरकारी अनुमति के खरीदना, बेचना या रजिस्टर करना गैरकानूनी है। इसे “निषिद्ध संपत्तियां” कहा जाता है। ये संपत्तियां मुख्य रूप से ऐसे इलाके होते हैं जहाँ कोई कानूनी पाबंदी लगी हो, सरकारी भूमि हो, विवादित ज़मीन हो या अन्य कारणों से लेन-देन प्रतिबंधित किया गया हो।
इसलिए, जमीन की खरीदारी से पहले यह जांचना आवश्यक है कि आपकी इच्छित संपत्ति इस सूची में तो नहीं है। इससे आपको भविष्य में कानूनी जटिलताओं से बचने में मदद मिलेगी। इस पूरी प्रक्रिया से अवैध और धोखाधड़ी संबंधी सौदों को रोका जाता है और भूमि के सही और सुरक्षित लेन-देन को सुनिश्चित किया जाता है।
AP Prohibited Properties निषिद्ध गुण क्या हैं?
निषिद्ध संपत्तियाँ वे ऐसी भूमि या संपत्ति होती हैं जिनका कानूनी रूप से पंजीकरण नहीं किया जा सकता। इन संपत्तियों पर खरीद-फरोख्त, हस्तांतरण या पंजीकरण की अनुमति नहीं होती क्योंकि ये विशेष कारणों से प्रतिबंधित होती हैं।
यह प्रतिबंध विभिन्न आधारों पर हो सकता है, जैसे कि संपत्ति सरकारी स्वामित्व वाली हो, उस पर कोई विवाद या दावा हो, न्यायालयी आदेश से रोक हो, या तकनीकी कारणों से पंजीकरण विभाग द्वारा अवरुद्ध की गई हो।
इसका मुख्य उद्देश्य अवैध एवं विवादित लेन-देन को रोकना और भूमि के सही प्रबंधन को सुनिश्चित करना है। इसलिए, किसी भी संपत्ति के लेन-देन से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि वह संपत्ति निषिद्ध सूची में तो नहीं है, जिससे भविष्य में कानूनी मुश्किलों से बचा जा सके।
IGRS AP में निषिद्ध संपत्तियों की जांच करने के लिए विवरण कैसे जांचे?

- सबसे पहले, आपको https://registration.ap.gov.in/igrs पर जाकर आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा।
- होमपेज पर “निषिद्ध गुण” विकल्प चुनें।
- शहरी या ग्रामीण संपत्ति का चयन करें।
- संबंधित जिला, मंडल और गांव का नाम भरें।
- शहरी संपत्तियों के लिए दरवाजा संख्या या ग्रामीण संपत्तियों के लिए सर्वेक्षण संख्या दर्ज करें।
- सभी नंबरों की जांच के लिए “*” का उपयोग करें।
- “विवरण प्राप्त करें” बटन दबाएं जिससे निषिद्ध संपत्ति रिपोर्ट दिखेगी।
- यह प्रक्रिया संपत्ति खरीदने से पहले उसकी कानूनी स्थिति समझने में मदद करती है।
- यह आपको अवैध लेन-देन और विवाद से बचाती है।
- सुनिश्चित करें कि संपत्ति पंजीकरण के लिए उपयुक्त और समस्या मुक्त हो।
- इस तरह आप IGRS AP पोर्टल पर आसानी से निषिद्ध संपत्तियों की जांच कर सुरक्षित संपत्ति लेन-देन कर सकते हैं।
निषिद्ध संपत्तियां निषिद्ध क्यों हैं? और इसके गुण क्या है?
- निषिद्ध संपत्तियां इसलिए होती हैं क्योंकि उन पर विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक प्रतिबंध होते हैं जो उनके लेन-देन को रोकते हैं। इनमें शामिल प्रमुख कारण हैं।
- ये भूमि अक्सर सरकारी अधिग्रहण में होती हैं या सरकारी विभागों की संपत्ति होती हैं, जिन पर खरीद-बिक्री की अनुमति नहीं होती।
- कुछ भूमि विशेष वर्गों को आवंटित होती हैं, जैसे पिछड़े वर्ग की जमीन, जिसे बेचना कानूनी अपराध माना जाता है।
- न्यायालयों में लंबित विवादों या मामलों वाली संपत्तियां भी निषिद्ध मानी जाती हैं।
- धार्मिक एवं ट्रस्ट संपत्तियां, जैसे मंदिर, मस्जिद, या वक्फ भूमि, जिनका उपयोग सामाजिक या धार्मिक कार्यों हेतु होता है।
- सीलिंग अधिनियम के तहत जब्त की गई भूमि या गैर-कृषि भूमि जिनका कानूनी परिवर्तन नहीं हुआ।
- अतिक्रमित या विवादित जमीनें जो विवादों के कारण पंजीकरण योग्य नहीं होतीं।
- इन संपत्तियों पर निवेश करने या लेन-देन करने से कानूनी समस्याएं, विवाद, पंजीकरण रद्द होना, और बैंक ऋण न मिलना जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए, ऐसी संपत्तियों का पता लगा कर ही जमीन की खरीद-फरोख्त करनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी नुकसान से बचा जा सके। यह व्यवस्था भूमि के सुरक्षित और सुव्यवस्थित प्रबंधन के लिए आवश्यक है।
भूमि विज्ञापन में निषिद्ध भूमि के रूप में हो तब क्या करना चाहिए?
- भूमि विज्ञापन में निषिद्ध भूमि के रूप में बताई गई है, तो आपको तुरंत निम्न कदम उठाने चाहिए।
- दस्तावेजों का संग्रह: अपने स्वामित्व और स्थिति को साबित करने वाले सबूत जैसे प्रमाणित प्रतिलिपि, भार प्रमाणपत्र (EC), और भू-स्केच इकट्ठा करें।
- संबंधित विभाग से संपर्क: सरकारी विभाग जैसे राजस्व कार्यालय या बंदोबस्ती विभाग से जाकर जानकारी प्राप्त करें।
- आधिकारिक वेबसाइट पर जाँच: https://registration.ap.gov.in/igrs पर जाकर निषिद्ध संपत्ति की सूची में अपने भूखंड का पता लगाएँ।
- आवेदन करें: यदि आपकी जमीन निषिद्ध सूची में है, तो तुरंत संबंधित प्राधिकारी को लिखित में शिकायत या आवेदन दें।
- कानूनी सलाह लें: किसी भी कदम से पहले वकील से परामर्श जरूरी है, खासकर यदि मुकदमों या विवाद की स्थिति हो।
- EC प्रमाणपत्र लें: यह यह सुनिश्चित करता है कि जमीन पर कोई बकाया या दावा नहीं है।
इन कदमों का पालन करके आप निषिद्ध भूमि की पूरी स्थिति समझ सकते हैं और भविष्य में किसी भी कानूनी परेशानी से बच सकते हैं।
मीभूमि या वेबलैंड पर निषिद्ध भूमि जाने?
- सबसे पहले https://meebhoomi.ap.gov.in/ पर जाएं।
- यहाँ से 1B या Adangal रिकॉर्ड डाउनलोड करें।
- डाउनलोड किए गए दस्तावेज़ों के “टिप्पणी” या “विशेष नोट्स” सेक्शन में “निषिद्ध संपत्ति” लिखा हो तो समझ लें कि वह भूमि निषिद्ध है।
- आप वेबलैंड पोर्टल या संबंधित पंजीकरण विभाग से भी सत्यापन कर सकते हैं।
- निषिद्ध संपत्ति खरीदना गैरकानूनी होता है और इससे आपका सौदा रद्द हो सकता है।
- इसलिए जमीन खरीदने से पहले सरकारी रिकॉर्ड की जांच करना अनिवार्य है।
- यह प्रक्रिया संपत्ति की वैधता और सुरक्षा सुनिश्चित करती है, जिससे कानूनी परेशानियों से बचा जा सकता है।
AP निषिद्ध संपत्तियों का विवरण:
- सर्वेक्षण संख्या: जमीन की पहचान के लिए अनूठी संख्या।
- सीमा (इकाई): भूमि की माप क्षेत्र।
- गाँव का नाम: संबंधित गांव का नाम जहां भूमि स्थित है
- अधिसूचना संख्या एवं दिनांक: उस संपत्ति को निषिद्ध घोषित करने वाली आधिकारिक अधिसूचना का संदर्भ।
- निषिद्ध प्रकार: जैसे असाइन की गई, बंदोबस्ती, न्यायालय द्वारा स्थगित आदि।
- बिक्री के लिए अयोग्यता का कारण: क्यों वह संपत्ति बेची नहीं जा सकती।
सावधानियां:
- धारा 22-ए के तहत कुछ भूमि का पंजीकरण प्रतिबंधित होता है, जैसे सरकारी या वन भूमि।
- पंजीकरण से पहले IGRS AP पोर्टल पर इसकी जांच जरूरी है।
- भूमि का विवरण उप-पंजीयक और ग्राम राजस्व कार्यालय से सत्यापित कर लें।
- खरीदारी से पहले एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (ईसी) अवश्य प्राप्त करें, जिससे जमीन पर किसी प्रकार का दावा पता चलता है।
- जरूरत हो तो कानूनी सलाहकार की राय लें।
- संपत्ति खरीदना बड़ा निर्णय है, इसलिए जांच-पड़ताल और कानूनी स्वीकृति के बिना कभी भी खरीदारी न करें।
निष्कर्ष
निषिद्ध संपत्तियां वे जमीनें होती हैं जिन पर कानूनी प्रतिबंध होते हैं और जिन्हें खरीदना, बेचना या पंजीकृत करना मना होता है। इनमें सरकारी भूमि, वन भूमि, आवंटित भूमि, धार्मिक ट्रस्ट की भूमि, न्यायालय में विवादित भूमि शामिल होती हैं। ये संपत्तियां भारत के पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 22-ए के अंतर्गत आती हैं।
पंजीकरण के पहले भूमि के विवरण की जांच IGRS AP पोर्टल या संबंधित ग्राम राजस्व कार्यालय से जरूर करें। एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट (EC) से यह पता चलता है कि भूमि पर कोई दावा या बकाया तो नहीं है। किसी भी विवाद या अंसुलझे प्रश्न के लिए कानूनी सलाह लेना आवश्यक है। निषिद्ध संपत्ति से बचकर खरीदारी करना ही सुरक्षित और सही कदम है ताकि भविष्य में कानूनी परेशानियां न हों।
FAQs
1. निषिद्ध संपत्ति क्या होती है?
वे भूमि या सम्पत्तियां जिन पर कानूनी पाबंदियाँ होती हैं और जो खरीद-फरोख्त के लिए अयोग्य होती हैं।
2. क्यों कुछ संपत्तियां निषिद्ध होती हैं?
सरकारी स्वामित्व, धार्मिक ट्रस्ट जुड़ी भूमि, न्यायिक विवाद, या विशेष कानूनी आदेश के कारण।
3. क्या निषिद्ध संपत्ति खरीदी जा सकती है?
नहीं, ऐसा करना अवैध होता है और लेन-देन रद्द हो सकता है।
4. निषिद्ध संपत्ति की जांच कैसे करें?
IGRS AP पोर्टल, मीभूमि या वेबलैंड जैसी आधिकारिक वेबसाइट पर जांच कर।
5. यदि मेरी जमीन गलत तरीके से निषिद्ध सूची में है तो क्या करूं?
संबंधित विभाग को आवेदन देकर सुधार की मांग करें और जरूरत पड़ने पर कानूनी सलाह लें।
6. खरीद से पहले किन दस्तावेजों की जाँच आवश्यक है?
प्रमाणित प्रतिलिपि, भार प्रमाणपत्र (EC), और एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट।
7. कानूनी सलाह क्यों जरूरी है?
ताकि विवाद से बचा जा सके और संपत्ति की वैधता सुनिश्चित हो।
इस साइट पर जो जानकारी आपको उपलब्ध हुई है वो एक इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से दी गयी है।